मंगलवार, मार्च 02, 2021
शुक्रवार, फ़रवरी 19, 2021
सोमवार, जनवरी 18, 2021
कहां लगाए तस्वीर
वास्तु के अनुसार, घर में भगवान की तस्वीरें लगाना शुभ होता है. भगवान की विभिन्न तस्वीरों का महत्व भी अलग-अलग है. श्रीकृष्ण के विभिन्न रूप प्रेरणादायक हैं. उनकी हर लीला अनुकरणीय और अनुपमेय है. घर में वास्तु ऊर्जा और संस्कारों को बढ़ाने के लिए भगवान कृष्ण के स्वरूप अतुलनीय हैं.
सुख-समृद्धि और लक्ष्यों को पूरा करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण की कौन सी तस्वीर घर में किस जगह पर लगानी चाहिए.
घर के उत्तर-पूर्व दिशा अर्थात् ईशान कोण में माखनचोर लड्डूगोपाल का दृश्य सहजता और प्रेम भरता है. मनुष्य के मन में आस्था जगाता है. घर में 12 वर्ष तक के बच्चे हों तो कृष्ण की बाल तस्वीर अवश्य लगाएं. यह स्मृति और बुद्धिमत्ता को बढ़ाने वाला है. पूर्व में श्रीकृष्ण के गोपाल रूप का चित्र लगाएं. यह धन धान्य और धर्म का प्रदाता है. ईश्वर भक्ति और आस्था के साथ प्रकृति से जुड़ाव का प्रतीक है. घर में लक्ष्मी का वास बना रहता है.
मंगलवार, दिसंबर 29, 2020
घोर अंधेरा था, दूर दूर तक सन्नाटा, हाथ को हाथ सुझाई नहीं दे रहा था। ऐसे अंधेरे में चमक रही थी, दो आंखें। और गूंज रही हैं भयंकर आवाज । यह आंखें और आवाज है किसकी। चलिए हम आवाज के और करीब चलते हैं, हम काफी नजदीक आ चुके हैं। अरे यह तो जंगल का राजा शेर हैं, मगर यह यहां कैसे, अरे यह तो पिंजरे में है।
अरे जंगल के राजा, तुम पिंजरें में कैसे?
निकला था शिकार पकड़ने, मगर खुद ही पकड़ा गया। ऐसा कैसे?
क्या तुम मुझे पिंजरे से नहीं निकाल सकते।
नहीं, क्योंकि मैं तो यहां नहीं हूं , मगर हां मैं किसी ओर को जोड़ता हूं। उधर देख वो ब्राह्मण, शायद वो निकाल दे। वो तो कुछ गुनगुना रहा है,
मैं तो चला जिधर चले रस्ता, होगा कोई मेरा भी साथी....
तेरा साथी यहां है पगले, किसी ने उसे कैद कर लिया है, आके उसे छुड़ा दे।
अरे यह किसने पुकारा मुझे। अरे यह तो जंगल का राजा है।
आप यहां आए किसलिए ।
तुमने पुकारा और हम चले आए, जान हथेली पर ले आए रे।
आए हैं तो मुझे कैद से निकालिए।
पहले पंजे अंदर डालिए। सोचता हूं कि मैं तुम्हे न
निकालूं
ऐसा क्या करते हो, काहे मुझसे डरते हो। मुझे अगर निकालोगे तो अभयदान भी पा लोगे।
वो तो सब ठीक है, मगर तुम्हारा क्या भरोसा, तुम मुझ पर ही हाथ साफ कर दो।
मैं वचन देता हूं, मैं तुम्हें नहीं मारूंगा।
अरे ब्राह्मण देव यह क्या कर रहे हो।
चुप करो तुम, खुद तो निकालते ही नहीं किसी और को भी मना करते हो।
खुल गई कुंडी, हो गया मैं आजाद।
मगर क्या करूं, भूख लग गई मुझे सामने तुम ही हो।
करो खुश मुझे करो, भरो पेट मेरा भरो।
मगर मेरे यार, तुम्हे पिंजरे से निकाला और तुम
अरे यार, तो मैं भी तो तुम्हें इस अस्थि पिंजर से निकाल रहा हूं, तुमने मुझे कैद से निकाला, तो मैं ऐसा कृतघ्न कैसे हो सकता हूं कि तुम्हें कैद में छोड़ दूं, मैं तुम्हे जन्मजन्मातर की कैद से मुक्त कर रहा हूं।इस संसार से आजाद।
नहीं तुम ऐसा नहीं कर सकते।
मैं बिल्कुल ऐसा कर सकता हूं।
भलाई के बदले भलाई की जगह बुराई क्या यही दुनिया की रीत है।
बिल्कुल। यही रीत है।
नहीं विश्वास हो कुछ औरों से पूछते हैं।
किसी एक ने भी यह कहा, भलाई के बदले भलाई होती है तो मैं तुम्हें छोड़ दूंगा, मंजूर
मंजूर, चलो पूछते हैं
और यह निकल पड़े हैं बात साबित करने
क्या होगा, क्या ब्राह्मण के प्राण बच पाएंगे या वह मारा जाएगा देखेंगे हम और आप।
सोमवार, दिसंबर 21, 2020
शुक्रवार, दिसंबर 18, 2020
क्या किया
घोर अंधरा था, दूर दूर तक सन्नाटा, हाथ को हाथ सुझाई नहीं दे रहा था। ऐसे अंधेरे में चमक रही थी, दो आंखें। यह आंखें हकीकी है। चलिए हम आवाज के करीब चलते हैं, अरे यह तो जंगल का राजा शेर हैं, लेकिन यह यहां कैसे, अरे यह तो पिंजरे में है।
हे जंगल के राजा, तुम कैसेरें में कैसे?
बाहर शिकार पकड़ने गया था, लेकिन खुद ही पकड़ा गया था। ऐसे कैसे?
क्या तुम मुझसे खाए नहीं निकाल सकते।
नहीं, क्योंकि मैं तो यहां नहीं हूं, लेकिन हां मैं किसी ओर को संग्रह हूं। उधर देख वो ब्राह्मण, शायद वो निकाल दे। वह तो कुछ गुनगुना रहा है,
मैं तो गया जिधर चले गए रिस्ता, होगा कोई मेरा भी साथी ...।
तेरा साथी यहाँ पगले, किसी ने उसे कैद कर लिया है, आके उसे छुड़ा दे।
अरे यह मुझे पुकारा है। अरे यह तो जंगल का राजा है।
आप यहाँ आए।
आप पुकारा और हम चले आए, जान हथेली पर ले आए रे।
आए हैं तो मुझे कैद से निकालिए।
पहले पंजे अंदर डालिए। सोचता हूँ कि मैं तुमसे हूँ न
निकालूं
ऐसा क्या हो सकता है, काहे मुझसे डरते हो। मुझे अगर निकालोगे तो अभयदान भी पा लोगे।
वो तो सब ठीक है, लेकिन तुम्हारा क्या भरोसा, तुम मुझ पर ही हाथ साफ कर दो।
मैं वचन देता हूं, मैं तुम्हें मारूंगा नहीं।
हे ब्राह्मण देव यह क्या कर रहे हो।
चुप करो तुम, खुद तो हटाते ही नहीं किसी और को भी मना करते हो।
खुल गया कुंडी, हो गया मैं आजाद।
लेकिन क्या करूं, भूख लग गई मुझे सामने तुम ही हो।
मुझे खुश कर दो, मेरा पेट काट दो।
लेकिन मेरे यार, तुम से पिंजरे से निकाला गया और तुम
अरे यार, तो मैं भी तुम्हें तुमसे इस अस्थि पिंजर से निकाल रहा हूं, तुम मुझे कैद से निकाला, तो मैं ऐसा उपहारघ्न कैसे हो सकता हूं कि तुम कैद में छोड़ दूं, मैं तुम्हें जन्म जन्ममतर की कैद से मुक्त कर रहा हूं।इस्सार । आजाद
तुम ऐसा नहीं कर सकते।
मैं बिल्कुल ऐसा कर सकता हूं।
भलाई के मोड़ भलाई की जगह बच क्या यही दुनिया की रीत है।
बिल्कुल। वह रीत है।
विश्वास नहीं हो कुछ और दोपहर से पूछते हैं।
किसी ने भी यह कहा, भलाई के बदले भलाई होती है तो मैं तुम्हें छोड़ दूंगा, मंजूर
मंजूर, चलो पूछते हैं
और यह निकल पड़े हैं बात साबित करने के लिए
क्या होगा, क्या ब्राह्मण के प्राण बचेंगे या वह मारा जाएगा हम और आप देखते हैं।
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